Download रावणों के घर जली इस बार दीवाली|दीपावली की शुभकामनायें इस ग़ज़ल के साथ|Happy Diwali |Geetkar Jay
रावणों के घर जली इस बार दीवाली|दीपावली की शुभकामनायें इस ग़ज़ल के साथ|Happy Diwali |Geetkar Jay
रावणों के घर जली इस बार दीवाली|दीपावली की शुभकामनायें इस ग़ज़ल के साथ|Happy Diwali |Geetkar Jay
आप सभी दोस्तों को दीपावली की ढेरों मुबारकबाद।
Happy Diwali friends.

मैं युवा गीतकार जय हा...
आप सभी दोस्तों को दीपावली की ढेरों मुबारकबाद।
Happy Diwali friends.

मैं युवा गीतकार जय हाज़िर हूँ हमारे समाज की सच्चाई और कानून व्यवस्था पर सवाल उठाती एक और ग़ज़ल के साथ।

आज की रचना इस प्रकार है -

अनमनी सी हो चली इस बार दीवाली।
बन गई टूटी कली इस बार दीवाली।

राम थे बेहाल महंगाई की मार से,
रावणों के घर जली इस बार दीवाली।

गांव के कुछ घरों में चूल्हे जले नहीं,
अंधकारों ने छली इस बार दीवाली।

चोर, रिश्वतखोर, धोखेबाज़ थे जो लोग,
उन्हीं को फूली फली इस बार दीवाली।

गीत, संगीत एवं स्वर - जयप्रकाश मिश्र (गीतकार जय)

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